" HUMAARI ANUBHŪTI "




" हम डांस के बारे में नहीं जानते थे कि किस तरह से किया जाता है, जब हमें डांस के बारे में जानकारी हुआ तो मुझे बहुत अच्छा लगा, हम सोचे भी नहीं थे कि इतना कम समय में कर लेंगे और अब मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है क्योंकि मैं पहली बार कथक डांस किया है और पहली बार स्टेज प्रोग्राम में भाग लिया है। "

- निकिता, बिहार 

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" पहले मुझे नए लोगों से बात करते हुए डर लगता था, मैं लोगों के सामने बोल नहीं पाती थी, कांपने जैसा लगता था। पर अभी वह कांपना दूर हो गया है, डर भी कम लगता है। "

- पोरिश्मिता, असम 

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" शुरू में मुझे डर लगता था कि मैं कत्थक कर भी पाऊंगी या नहीं, पर अभी मैंने खुद सीखने के साथ साथ कुछ बच्चों को कत्थक सिखाना भी शुरू कर दिया है। "

- रश्मिरेखा, असम

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" पहली बार जब कथक डांस के लिए भाग लिया तो बहुत डर लग रहा था कि कहीं मैं ना कर सकी तो मुझे निकाल देंगे। पर अब meditation सीखने के बाद मुझे अच्छे से ध्यान में रखकर सब करने का मन करता है। "

- कुमारी रामबती, सुकमा, छत्तीसगढ़



" जब मैं पहली बार कथक करने के लिए आई तो मुझे बहुत डर लग रहा था और मैं सोच रही थी कि मैं कथक कर भी सकुंगी या नहीं, लेकिन दीदी ने जब कथक सिखाया तो बहुत मज़ा आया। "

- कुमारी संगीता, सुकमा, छत्तीसगढ़  

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" In this workshop I learnt to be a responsible and disciplined person. I learned, Kathak is not just a classical dance, it is in fact a combination of punctuality, discipline, motivation and dedication. I have seen my enhanced dance postures and movements by the end of this workshop. This whole workshop changed my perspective towards classical dance. At last, I would say, I would love to continue performing Kathak and pass it on to others to create awareness in my surroundings. 

- Shalini, Itarsi, Madhya Pradesh



" I learned to behave between people in a group. The way Annu Di teaches, was amazing and impressive.

I also learned team work. It also inculcated many more values in me. "

- Sonakshi Dubey, Itarsi, Madhya Pradesh

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" The very first day when I came, I was little nervous as this was the first time when I was going to attend class without my friends. I was all alone and the place where I have to go to learn was far away from my home. It was difficult to convince my parents but yes I was succeeded in it but when I met with all other students, I was quite relaxed specially when I met with Annu mam. Her helpful nature filled me with confidence and assurance. This workshop has given me confidence and a sense of community.  I learnt coordination, discipline, determination and Anubhuti ..as the name reveals, I experienced many things in this workshop. " 

- Anjali Bijlani, Itarsi, MP 

 


" इस वर्कशॉप में सबसे अच्छा यह हुआ कि मैं अपनी आदतों को सुधार पाई। सुबह मुझे योग करना अच्छा नहीं लगता था, पर वर्कशॉप में आने के बाद योग करने से मेरा ध्यान पढ़ाई में लगने लगा, नहीं तो मुझे ऐसा लगता था कि योगा करने से कुछ नहीं होता है। "

- चेरी, इटारसी, मध्य प्रदेश

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“इस workshop के दौरान मैंने सीखा कि एक ग्रूप में कैसे डान्स किया जाता है और मुझे धैर्य रखना भी आ गया है, पहले मैं हर चीज को लेकर काफ़ी excited हो जाती थी, पर अब धैर्य के साथ करती हूँ। "

 – Sweety, Bodhgaya, Bihar

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"इस workshopने मुझे एक direction provideकी, जिसपे चलकर मैं खुद को और अच्छे से समझ सकता हूं। यहां पर एक ऐसा platform मिला कि हम समझ पाएं खुद को, खुद के साथ और दूसरों के साथ खुश रह सकें। यहां group activityकरने से एक leading qualityभी develop हुई। यहां आकर जो confidence मिला वो कभी घर में बैठे बैठे कितना भी कुछ करो पर नहीं मिलता।”

- Anurag, Bir, Himachal Pradesh

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" मेरा आत्मविश्वास बढ़ने लगा है और मेरे अंदर डर नाम की कोई चीज नहीं रही है। मैं आगे जाकर दूसरे लोगों को कत्थक सिखाऊँगी। अपने घर में भी सभी को मेडिटेशन और योग करने को कहूंगी। " 

- नमी चौधरी, इटारसी, मध्य प्रदेश  

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“मुझे आगे जाकर बोलने में डर लगता था, मेरा इस workshop के माध्यम से वह डर दूर हो गया, मैंने थोड़ी मेहनत की और धीरे धीरे बोलना सीख लिया।”

- Jyotsana, Virampur, Gujrat


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“दीदी, thank you so much.. मुझे स्टेज पर बोलते हुए बहुत डर लग रहा था, heartbeat बढ़ी हुई थी, हाथ भी काँप रहा था.. पर आपकी वजह से आज मैं सबके सामने बोल पाई, thank you दीदी मेरे अंदर ये courage और confidence जगाने के लिए...."

- Nidhi, Bodhgaya, Bihar

Host NGO Speaks

Neeraj Naidu, Co-founder, Shiksharth, Sukma

Rajvinit Gumber, Program Team Member, Shiksharth, Sukma

Pavan Deshmukh, Program Manager, Shiksharth, Sukma

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" Today was the most magical day. In Balatikra, Annu's children performed exceptionally. When the sound of Ghunghroos surrounded the hall, applauses naturally followed. Annu's performance, as a gift from her to the children, was magnetic. The Adhikshika, Principal and Political Leaders were overwhelmed that in a span of just a month children can perform so phenomenally and can speak confidently about the experience of learning Kathak. They appreciated Annu's work and repeatedly thanked Shiksharth many times. The children looked so happy and yet I could see the brimming dream in their eyes to do and be good in life. Perhaps it is my most happiest day with my team today. I don't know how can we thank Annu for being such a magic to children and Shiksharth. I hope we keep doing things like this in future for the children of Sukma. "

Pavan Deshmukh, Program Manager, Shiksharth, Sukma

Rajvinit Gumber, Program Team Member, Shiksharth, Sukma

Pavan Deshmukh, Program Manager, Shiksharth, Sukma

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" Indeed an exquisite and an elegant performance by the children. It got intensified and vivified when one of the student and performer affirmed with all the confidence that she would teach her siblings, friends and everyone else. Now that is what I consider as learning! A good event to experience. cheers! "

Rajvinit Gumber, Program Team Member, Shiksharth, Sukma

Rajvinit Gumber, Program Team Member, Shiksharth, Sukma

Rajvinit Gumber, Program Team Member, Shiksharth, Sukma

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" Indeed! It was a Miracle witnessed. It is a clear demonstration of Dedication and Passion by Annu Ji. The smiles on the faces of children while performing today shows the depth and nature of Art they have experienced and found over the last month. Salute! Today's event should inspire one and all to pursue what they believe in! " 

Hasmukh Patel, Founder, Samvedana Trust, Virampur, Gujrat

Pema Tsering, Principal, Maitreya School (Under Root Institute), Bodhgaya, Bihar

Pema Tsering, Principal, Maitreya School (Under Root Institute), Bodhgaya, Bihar

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  “ यह नृत्य की खासियत यह है कि इसकी वजह से आपके जीवन में ऐसा परिवर्तन आता है जो आपको दिखता नहीं है (tangibly) । अनु ने सही कहा कि यह जीवन कौशल्य है। फिर इस वर्कशॉप से जुड़ने के बाद बच्चा किसी भी क्षेत्र में जाए, उस बच्चे में एक प्रकार की संवेदना, संस्कृति के साथ लगाव , वह उस बच्चे में देखने को मिलता है। यह नृत्य यहां वीरमपुर में आया उसकी कल्पना करना बहुत मुश्किल चीज थी। भले ही यह नृत्य समझने के लिए बहुत मुश्किल है, लेकिन मैंने अनु को कहा कि तुम यहां रहो और बच्चों को सिखाओ , जैसा भी सीखते हैं बच्चे। पूरे देश में घूमती है यह। अनु तुम्हारा दिल से आभार। 20 दिन अच्छे से काम किया। मैं अपनी प्रसन्नता व्यक्त करता हूँ। बहुत मज़ा आया, 20 दिन में हमारी बेटी जैसी हो गई है यह , इसलिए इसका आभार भी क्या मानना। "

Pema Tsering, Principal, Maitreya School (Under Root Institute), Bodhgaya, Bihar

Pema Tsering, Principal, Maitreya School (Under Root Institute), Bodhgaya, Bihar

Pema Tsering, Principal, Maitreya School (Under Root Institute), Bodhgaya, Bihar

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“ Anu ji taught Kathak Dance to 30 of our girls for 3 weeks everyday for 4 hours. Though it was tough and tiring to teach Kathak Dance, Ms. Anu ji handled it very patiently, her professional skills made it easy to work with our children. Especially her love, care and inspiration moved some of our girls into tears in the end. It was the mixture of sweet and sorrow feelings. We are thankful to you, Anu Ji for making every single moment very enjoyable. You ignited our minds, instilled love and respect in our hearts through Kathak Dance. It was learning and feeling. Thank you for your precious time. Our best wishes are always with you. May you be always happy and healthy. ” 

Shilpa Vaishnav, Director, Samvedana Trust, Virampur, Gujrat

Pema Tsering, Principal, Maitreya School (Under Root Institute), Bodhgaya, Bihar

Shilpa Vaishnav, Director, Samvedana Trust, Virampur, Gujrat

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“ मेरा भी पर्सनल एक्सपीरियंस यह रहा है कि इस कत्थक वर्कशॉप के माध्यम से बच्चे बोलने लगे हैं और इनमे इतनी हिम्मत आई कि इन्होंने आज आप सबके सामने बोला है जो कि यह कभी भी बोलते नहीं थे, कभी भी स्टेज पर नहीं आते थे और घबराते थे।  बच्चों ने यह जो डांस सीखा और डांस परफॉरमेंस किया वह बहुत अच्छा किया और इसका सारा श्रेय अनु को जाता है। उनकी एक बात मुझे बहुत अच्छी लगी कि जब भी उनकी क्लास होती थी तो एक भी मिनट इधर या उधर नहीं होने देते थे। 8 बजे का हो तो 8 बजे, 10 बजे का हो तो 10 बजे,  वह एकदम परफेक्ट टाइम से आ जाती थी और अपने कार्यशाला के हॉल में पहुँच जाती थी। ऐसा उन्होंने 21 दिवस कंटिन्यू रखा। अगर उनकी जगह मैं होती तो कभी ना कभी तो समय को लेकर चूक हो जाती, लेकिन उनसे ऐसी चूक नहीं हुई.."